
“आज थोड़ा धीमे चलिए।
हर चीज़ को ठीक करना, आगे बढ़ाना या साबित करना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ चीज़ें तब ठीक होती हैं
जब आप खुद को बस ‘होने’ की अनुमति देते हैं।”

“आज थोड़ा धीमे चलिए।हर चीज़ को ठीक करना, आगे बढ़ाना या साबित करना ज़रूरी नहीं होता।कुछ चीज़ें तब ठीक होती हैंजब आप खुद को बस ‘होने’ की अनुमति देते हैं।”

“आज थोड़ा धीमे चलिए।
हर चीज़ को ठीक करना, आगे बढ़ाना या साबित करना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ चीज़ें तब ठीक होती हैं
जब आप खुद को बस ‘होने’ की अनुमति देते हैं।”
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Leave a comment