
“विकास हमेशा शोर नहीं मचाता।
कभी-कभी वह चुपचाप आता है —
धैर्य, स्पष्टता और भीतर की शांति के रूप में।”

“विकास हमेशा शोर नहीं मचाता।कभी-कभी वह चुपचाप आता है —धैर्य, स्पष्टता और भीतर की शांति के रूप में।”

“विकास हमेशा शोर नहीं मचाता।
कभी-कभी वह चुपचाप आता है —
धैर्य, स्पष्टता और भीतर की शांति के रूप में।”
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