
“प्यार चुपचाप बढ़ता है—
जब आप बिना सुधारने के सुनते हैं,
बिना भागे साथ रहते हैं,
और हर दिन दयालुता को चुनते हैं।”
आत्मा की याद दिलाने वाली बात:
सच्चा प्यार शोर नहीं करता।
वह स्थिर होता है, सुरक्षित होता है,
और पूरी तरह उपस्थित रहता है।

“प्यार चुपचाप बढ़ता है—जब आप बिना सुधारने के सुनते हैं,बिना भागे साथ रहते हैं,और हर दिन दयालुता को चुनते हैं।” आत्मा की याद दिलाने वाली बात:सच्चा प्यार शोर नहीं करता।वह स्थिर होता है, सुरक्षित होता है,और पूरी तरह उपस्थित रहता है।

“प्यार चुपचाप बढ़ता है—
जब आप बिना सुधारने के सुनते हैं,
बिना भागे साथ रहते हैं,
और हर दिन दयालुता को चुनते हैं।”
आत्मा की याद दिलाने वाली बात:
सच्चा प्यार शोर नहीं करता।
वह स्थिर होता है, सुरक्षित होता है,
और पूरी तरह उपस्थित रहता है।
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